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मां के दूध के 7 अनजाने फायदों के बारे में जानें
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ माठका दूध नवजात शिशॠको पिलाना है ज़रूरी? जाने!
माठका दूध नवजात शिशॠके लिठरकà¥à¤·à¤¾à¤¸à¥‚तà¥à¤° की तरह काम करता है। या यूं कहे तो माठका दूध बचà¥à¤šà¥‡ के लिठजीवनदायिनी अमृतधारा के समान है। पहले के जमाने में बिना सही जानकारी या अंधविशà¥à¤µà¤¾à¤¸ के चलते लोग बचà¥à¤šà¥‡ के जनà¥à¤® के तà¥à¤°à¤¨à¥à¤¤ बाद सà¥à¤¤à¤¨ में जो पहली बार पीले रंग का जो दूध आता है (first milk- colostrum) उसको निकाल कर फेंक देते हैं लेकिन सच तो ये है कि ये पहला दूध नवजात शिशॠके संरकà¥à¤·à¤£ के लिठसबसे ज़रूरी होता है। ये दूध पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨ और à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€ बॉडी के गà¥à¤£ से à¤à¤°à¤ªà¥‚र होता है जो शिशॠके इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ लेवल को मजबूत करने में अहमॠà¤à¥‚मिका निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है। ये नवजात शिशॠके डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤® को बेहतर बनाने में à¤à¥€ बहà¥à¤¤ मदद करता है। लेकिन इसके साथ ये जानना ज़रूरी है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ माठका दूध शिशॠके लिठज़रूरी और सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ होता है। साथ ही आपको ये जानकर आशà¥à¤šà¤°à¥à¤¯ होगा कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने से माठको à¤à¥€ बहà¥à¤¤ शारीरिक तौर पर लाठमिलता है।
इस बारे में सही और विसà¥à¤¤à¥ƒà¤¤ जानकारी लेने के लिठहमने शिशॠरोग विशेषजà¥à¤žà¤¾ गीतांजली शाह, अशà¥à¤µà¤¿à¤¨à¥€ हॉसà¥à¤ªà¤¿à¤Ÿà¤² à¤à¤£à¥à¤¡ आईवीà¤à¤« सेंटर और सà¥à¤ªà¥à¤°à¤¾à¤œà¤¼à¤¾ फाउनà¥à¤¡à¥‡à¤¶à¤¨, मà¥à¤®à¥à¤¬à¤ˆ से बात की। उनà¥à¤¹à¥‹à¤‚ने इस बारे में बहà¥à¤¤ दिलचसà¥à¤ª और महतà¥à¤µà¤ªà¥‚रà¥à¤£ जानकारियाठदी जो हम आपके साथ शेयर कर रहे हैं।
कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ माठका दूध नवजात शिशॠको पिलाना है ज़रूरी-
माठका दूध सरà¥à¤µà¥‹à¤¤à¥à¤¤à¤® आहार कà¥à¤¯à¥‹à¤‚ है?
माठके दूध में कोलेसà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤® का उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦à¤¨ होता है जिसमें पà¥à¤°à¥‹à¤Ÿà¥€à¤¨, कैलà¥à¤¸à¤¿à¤¯à¤®, à¤à¤¨à¥à¤Ÿà¥€à¤¬à¥‰à¤¡à¥€, लिपिड, कारà¥à¤¬à¥‹à¤¹à¤¾à¤‡à¤¡à¥à¤°à¥‡à¤¡, मिनरल और बहà¥à¤¤ सारे पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• ततà¥à¤µ होते हैं जो शिशॠके शारीरिक और आंतरिक विकास के लिठज़रूरी होता है। माठके दूध में पानी की मातà¥à¤°à¤¾ इतनी होती है वह शिशॠके शरीर में पानी की आवशà¥à¤¯à¤•ता को पूरà¥à¤£ करने में पूरी तरह से सकà¥à¤·à¤® होता है। माठके दूध की सबसे अचà¥à¤›à¥€ बात ये है कि पà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥à¤¯à¥à¤° हो या या नॉरà¥à¤®à¤² दोनों उमà¥à¤° के शिशॠके ज़रूरत को पूरा करने की ये कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ रखता है। इसलिठजनà¥à¤® से छह महीने तक दूध पिलाना शिशॠके लिठबहà¥à¤¤ ही आवशà¥à¤¯à¤• होता है।
इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤® या रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को सà¥à¤¦à¥ƒà¤¢à¤¼ करता है- माठके दूध में इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¥‹à¤—à¥à¤²à¥‹à¤¬à¥à¤¯à¥‚लीन (immunoglobulin) का लेवल हाई होता है जो बचà¥à¤šà¥‡ के रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ को बढ़ाने के लिठसबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ ज़रूरी होता है। माठके दूà¥à¤§ में लैकà¥à¤Ÿà¥‹à¤«à¥‹à¤°à¥à¤®à¤¿à¤¨ नाम का ततà¥à¤µ होता है जो शिशॠके आंतों में रोगाणॠके पनपने से रोकते हैं।
पाचन शकà¥à¤¤à¤¿ को बेहतर बनाता है- नवजात शिशॠका डाइजेसà¥à¤Ÿà¤¿à¤µ सिसà¥à¤Ÿà¥‡à¤® बहà¥à¤¤ कमजोर होता है इसलिठउस वकà¥à¤¤ माठका दूध ही à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤• आहार है जो वह आसानी से हजम à¤à¥€ कर सकता है और शरीर को पूरà¥à¤£ रूप से सारी पौषà¥à¤Ÿà¤¿à¤•ता à¤à¥€ मिल जाती है। जनà¥à¤® के छह हफ़à¥à¤¤à¥‡ तक शिशॠकी पाचन शकà¥à¤¤à¤¿ बहà¥à¤¤ ही कमजोर रहती है माठका दूध आंतों की इमà¥à¤¯à¥à¤¨à¤¿à¤Ÿà¥€ लेवल को मजबूत करने में अहमॠà¤à¥‚मिका को निà¤à¤¾à¤¤à¤¾ है।
संकà¥à¤°à¤®à¤£ से शिशॠको सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने में मदद करता है- नवजात शिशॠको जनà¥à¤® से संकà¥à¤°à¤®à¤£ होने का बहà¥à¤¤ खतरा होता है जिसके कारण उनà¥à¤¹à¥‡ दसà¥à¤¤, कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£, नà¥à¤¯à¥‚मोनिया आदि होने का बहà¥à¤¤ खतरा होता है। इसलिठपà¥à¤°à¥€à¤®à¥ˆà¤šà¥à¤¯à¥à¤° बेबी से लेकर नॉरà¥à¤®à¤² बेबी सà¤à¥€ को माठका दूध पिलाना बहà¥à¤¤ ज़रूरी होता है इससे शरीर किसी à¤à¥€ संकà¥à¤°à¤®à¤£ से खà¥à¤¦ को सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ रखने में सकà¥à¤·à¤® हो पाता है।
संदूषण(contamination) की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ न के बराबर होती है- शिशॠको ऊपर का दूध पिलाने पर इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का डर सबसे जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ होता है लेकिन सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ कराने पर इसका खतरा शà¥à¤¨à¥à¤¯ के समान होता है। इससे शिशॠको किसी à¤à¥€ पà¥à¤°à¤•ार के संकà¥à¤°à¤®à¤£ या इंफेकà¥à¤¶à¤¨ होने का खतरा à¤à¥€ कम होता है।
अब चलते हैं कि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने या शिशॠको दूध पिलाने पर माठको कà¥à¤¯à¤¾ लाठपहà¥à¤à¤šà¤¤à¤¾ है-
माठकी कैलोरी बरà¥à¤¨ होता है- शिशॠको सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने पर माठका जो बड़ा हà¥à¤† वज़न होता है वह धीरे-धीरे कंटà¥à¤°à¥‹à¤² में आने लगता है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि इससे बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कैलोरी बरà¥à¤¨ होता है। यानि सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने पर माठबहà¥à¤¤ जलà¥à¤¦à¥€ शेप में आ सकती हैं।
गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का संकà¥à¤šà¤¨ बेहतर होता है- पà¥à¤°à¤¸à¤µ के बाद माठको इंटरनल बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग आदि की समसà¥à¤¯à¤¾ आदि होती है लेकिन सà¥à¤¤à¤¨à¤ªà¤¾à¤¨ करवाने पर गरà¥à¤à¤¾à¤¶à¤¯ का संकà¥à¤šà¤¨ होने के साथ-साथ इंटरनल बà¥à¤²à¥€à¤¡à¤¿à¤‚ग की समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ कà¥à¤› हद तक कम हो जाती है।
माठके लिठशिशॠको आहार देने की सहà¥à¤²à¤¿à¤¯à¤¤- माठशिशॠको कहीं à¤à¥€ किसी à¤à¥€ वकà¥à¤¤ दूध पिला सकती है इसके लिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ किसी चीज पर निरà¥à¤à¤° नहीं रहना पड़ता है।
इसलिठà¤à¤• वाकà¥à¤¯ में यही कह सकते हैं कि माठका दूध हर शिशॠका अधिकार और उसकी अहमॠज़रूरत है, इससे उसे वंचित न करें!!
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